एक सज्जन ने पूछा है कि मेरा विश्वास सनातन धर्म में है। बजरंगबली महावीर में मेरी अटूट श्रद्धा है। आपकी बातें मुझे दिलचस्प तो लगती हैं, लेकिन हमारे सनातन धर्म से उनका मेल नहीं बैठता।
तुम कहते हो कि ‘मेरा विश्वास सनातन धर्म में है।’
कैसे तुम्हारा विश्वास है? किस आधार पर तुम्हारा विश्वास है? संयोग की बात है कि तुम हिंदू घर में पैदा हो गए। तुमको बचपन में उठा कर मुसलमान के घर में रख देते, तो तुम्हारी अटूट श्रद्धा इस्लाम में होती। हिंदुओं के गले काटते। तब तुम यह महावीर सेवा दल वालों की जान ले लेते। तब तुम कुछ और दल बनाते। रजाकार! तब तुम दूसरा झंडा खड़ा करते कि इस्लाम खतरे में है! और मेरा विश्वास इस्लाम में है! और तुम ईसाई घर में पैदा हो जाते, तो तुम यही उपद्रव वहां करते।
तुम्हारा विश्वास है कैसे? किसी आधार पर तुम्हारा विश्वास है? सिर्फ यही न कि तुम्हारे मां-बाप ने तुम्हें यह सिखा दिया कि हनुमान जी हैं, ये पत्थर की मूर्ति नहीं हैं। इनकी सेवा करो। इन्हें नाराज मत करना। हनुमान-चालीसा पढ़ो। यह बेटा, बहुत फल देंगे। ये बड़े भोले-भाले हैं। इनको मना लेना बड़ा आसान है। जो चाहोगे, ये कर देंगे!
इसी सब पागलपन के पीछे तो यह देश गरीब है। यह सारा श्रम अगर देश को समृद्ध बनाने में बनाने में लगे, तो इस देश के पास बड़ी समृद्ध पृथ्वी है। और हमारे पास पांच हजार साल का अनुभव होना चाहिए था। हमें तो दुनिया में शिखर पर होना था। मगर एक तरफ अंधविश्वास और दूसरी तरफ तुम्हारे महात्मागण, जो कह रहे हैं, जो कह रहे हैं-सब त्यागो, सब छोड़ो; भौतिकता छोड़ो!
तो गरीब न रहोगे, तो क्या होगा!
ओशो
तुम कहते हो कि ‘मेरा विश्वास सनातन धर्म में है।’
कैसे तुम्हारा विश्वास है? किस आधार पर तुम्हारा विश्वास है? संयोग की बात है कि तुम हिंदू घर में पैदा हो गए। तुमको बचपन में उठा कर मुसलमान के घर में रख देते, तो तुम्हारी अटूट श्रद्धा इस्लाम में होती। हिंदुओं के गले काटते। तब तुम यह महावीर सेवा दल वालों की जान ले लेते। तब तुम कुछ और दल बनाते। रजाकार! तब तुम दूसरा झंडा खड़ा करते कि इस्लाम खतरे में है! और मेरा विश्वास इस्लाम में है! और तुम ईसाई घर में पैदा हो जाते, तो तुम यही उपद्रव वहां करते।
तुम्हारा विश्वास है कैसे? किसी आधार पर तुम्हारा विश्वास है? सिर्फ यही न कि तुम्हारे मां-बाप ने तुम्हें यह सिखा दिया कि हनुमान जी हैं, ये पत्थर की मूर्ति नहीं हैं। इनकी सेवा करो। इन्हें नाराज मत करना। हनुमान-चालीसा पढ़ो। यह बेटा, बहुत फल देंगे। ये बड़े भोले-भाले हैं। इनको मना लेना बड़ा आसान है। जो चाहोगे, ये कर देंगे!
इसी सब पागलपन के पीछे तो यह देश गरीब है। यह सारा श्रम अगर देश को समृद्ध बनाने में बनाने में लगे, तो इस देश के पास बड़ी समृद्ध पृथ्वी है। और हमारे पास पांच हजार साल का अनुभव होना चाहिए था। हमें तो दुनिया में शिखर पर होना था। मगर एक तरफ अंधविश्वास और दूसरी तरफ तुम्हारे महात्मागण, जो कह रहे हैं, जो कह रहे हैं-सब त्यागो, सब छोड़ो; भौतिकता छोड़ो!
तो गरीब न रहोगे, तो क्या होगा!
ओशो
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