शनिवार, 27 अगस्त 2016

ओलम्पिक खेल

ओलम्पिक खेलों में भारत की जीत के लिये ब्रह्मा की मुखयोनि से जन्म लेने वाले कई ब्रम्हज्ञानी देश के कई स्थानों पर अपनी बिना मेहनत की कमाई से यज्ञ , हवन , तन्त्र , मन्त्र ,पूजा आदि करते रहे परन्तु भारत गोल्डमेडल लिस्ट में बौद्धकाल की अपनी खोज शून्य पर ही सिमटा रहा । सी ० बी० आई० जाँच करे कि ब्रम्हज्ञानियों ने घूस ( रिश्वत ) उर्फ दक्षिणा लेकर कहीं अमेरिका , चीन आदि के लिये तो उक्त पूजा पाठ नहीं किया था । और केन्द्र सरकार उन्हे हर हालत में गिरफ्तार करे । चाहे देशद्रोह में अथवा संविधान की धारा 51 A के अन्तरगत अन्धविश्वास फैलाने के आरोप में ।
जब तक कपटाचारी , धूर्त , बेईमान , अन्यायी द्रोणाचार्य ( राजाओं का दोनाचाट ) व अर्जुन का महिमामंडन व उनके नाम के पुरुष्कार खेलजगत में बन्द करके एकलब्य और झलकारी बाई का महिमामंडन व उनके नाम के पुरस्कार प्रारम्भ नहीं किये जायेंगे , व जीतने के लिये पूजापाठ करने वालों का बहिष्कार करके उनको कड़ी सजा नहीं दी जायेगी तब तक भारत का यही हस्र होगा ।

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