ओलम्पिक खेलों में भारत की जीत के लिये ब्रह्मा की मुखयोनि से जन्म लेने वाले कई ब्रम्हज्ञानी देश के कई स्थानों पर अपनी बिना मेहनत की कमाई से यज्ञ , हवन , तन्त्र , मन्त्र ,पूजा आदि करते रहे परन्तु भारत गोल्डमेडल लिस्ट में बौद्धकाल की अपनी खोज शून्य पर ही सिमटा रहा । सी ० बी० आई० जाँच करे कि ब्रम्हज्ञानियों ने घूस ( रिश्वत ) उर्फ दक्षिणा लेकर कहीं अमेरिका , चीन आदि के लिये तो उक्त पूजा पाठ नहीं किया था । और केन्द्र सरकार उन्हे हर हालत में गिरफ्तार करे । चाहे देशद्रोह में अथवा संविधान की धारा 51 A के अन्तरगत अन्धविश्वास फैलाने के आरोप में ।
जब तक कपटाचारी , धूर्त , बेईमान , अन्यायी द्रोणाचार्य ( राजाओं का दोनाचाट ) व अर्जुन का महिमामंडन व उनके नाम के पुरुष्कार खेलजगत में बन्द करके एकलब्य और झलकारी बाई का महिमामंडन व उनके नाम के पुरस्कार प्रारम्भ नहीं किये जायेंगे , व जीतने के लिये पूजापाठ करने वालों का बहिष्कार करके उनको कड़ी सजा नहीं दी जायेगी तब तक भारत का यही हस्र होगा ।
जब तक कपटाचारी , धूर्त , बेईमान , अन्यायी द्रोणाचार्य ( राजाओं का दोनाचाट ) व अर्जुन का महिमामंडन व उनके नाम के पुरुष्कार खेलजगत में बन्द करके एकलब्य और झलकारी बाई का महिमामंडन व उनके नाम के पुरस्कार प्रारम्भ नहीं किये जायेंगे , व जीतने के लिये पूजापाठ करने वालों का बहिष्कार करके उनको कड़ी सजा नहीं दी जायेगी तब तक भारत का यही हस्र होगा ।
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