शनिवार, 14 मई 2016

ग्लोबल वॉर्मिंग

क्या सचमुच ग्लोबल वॉर्मिंग जैसी कोई प्रक्रिया हो रही है?

जी हां, बिल्कुल हो रही है। जलवायु में बदलाव हो रहा है, इसके प्रमाण :
  1. वैज्ञानिकों ने यह पाया है कि औद्योगिक क्रांति के बाद से वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड और ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में बेतहाशा इजाफा हो रहा है।
  2. प्रयोगों के द्वारा यह भी साबित हो चुका है कि ग्रीन हाउस जब वायुमंडल में मौजूद होती हैं तो वे सूरज की गर्मी को अवशोषित करती हैं। जिससे कि हमारे वातावरण का तापमान बढ़ता ही है।
  3. पिछले 100 सालों में विश्व के तामपान में कम से कम 0.85 सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है। इतना ही नहीं, इस दौरान समुद्र स्तर में भी 20 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है।
  4. पृथ्वी की जलवायु में चिंताजनक ढंग से बदलाव हो रहा है। मसलन उत्तरी गोलाद्ध में हिमपात का कम होना, आर्कटिक महासागर में बर्फ का पिघलना और सभी महाद्वीपों में ग्लेशियरों का पिघलना।
  5. पिछले 150 सालों में प्रकृतिक घटनाओं में भी जबरदस्त बदलाव देखनो को मिल रहा है। जैसे कि बेमौसम बारीश और ज्वालामुखी विस्फोट। हालांकि सिर्फ इन घटनाओं से ग्लोबल वॉर्मिंग को नहीं आंका जा सकता।
  6. पिछ्ले 50 वर्षों की वार्मिंग प्रव्रति लगभग दोगुना है पिछले 100 वर्षों के मुकाबले, इसका अर्थ है की वार्मिंग प्रव्रति की रफ़तार बढ रही है।
  7. समुद्र का तापमान 3000 मीटर (लगभग 9,800 फ़ीट) की गहराई तक बढ चुका है; समुंद्र जलवायु के बढे हुऎ तापमान की गर्मी का 80 प्रतिशत सोख लेते है।
  8. उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्धों में ग्लेशियर और बर्फ़ ढकें क्षेत्रों में कमी हुई है जिसकी वजह से समुंद्र का जलस्तर बढ गया है।
  9. पिछले 100वर्षों सेअंटार्टिका का औसत तापमान पृथ्वी के औसत तापमान से दोगुनी रफ़्तार से बढ रहा है । अंटार्टिका में बर्फ़ जमे हुऎ क्षेत्र में 7 प्रतिशत की कमी हुई है जबकि मौसमी कमी की रफ़्तार 15 प्रतिशत तक हो चुकी है।
  10. उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्से, उत्तरी युरोप और उत्तरी एशिया के कुछ हिस्सों में बारिश ज़्यादा हो रही है जबकि भूमध्य और दक्षिण अफ्रीका में सुखे के रुझान बढते जा रहे हैं।पश्चिमी हवायें बहुत मज़बुत होती जा रही हैं।
  11. सुखे की रफ़्तार तेज होती जा रही है, भविष्य में ये ज़्यादा लम्बे वक्त तक और ज़्यादा बडे क्षेत्र में होंगे। उच्चतम तापमान में बहुत महत्वपुर्ण बदलाव हो रहे हैं—गर्म हवायें और गर्म दिन बहुत ज़्यादा देखने को मिल रहे है जबकि ठंडे दिन और ठंडी रातें बहुत कम हो गयी है।
  12. अटलांटिक संमुद्र की सतह के तापमान में व्रद्धि की वजह से कई तुफ़ानों की तीव्रता में व्रद्धि देखी गयी है हांलकि उष्णकटिबंधीय तुफ़ानों की सख्यां में व्रद्धि नही हुई है।
  13. विश्व भर में मौसम में अजीबो-गरीब तरीके से बदलाव देखने को मिला है। बारिश और बर्फबारी में अंतर नोटिस किया जा सकता है। उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका, यूरोप और उत्तरी-केंद्रीय एशिया में ज्यादा बारिश हो रही है। वहीं, मध्य अफ्रीका का साहेल इलाका, दक्षिणी अफ्रीका, भूमध्य सागर और दक्षिण एशिया सागर का इलाका सूख रहा है। साहेल अफ्रीका का वह इलाका है जो दशकों तक सूखे का प्रकोप झेल चुका है। आश्चर्यजनक रूप से इस इलाके में ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से बारिश भी हुई है। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि यह लंबे समय तक नहीं टिकने वाला। जलवायु परिवर्तन के नतीजन विश्व को गर्म हवाओं सूखे, बाढ़ और भयानक बीमीरियों का सामना करना होगा।

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